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04 January, 2012

यार भी मिले,

यार भी मिले, 
तो गुल ऐ खुर्शीद की तरह ...


जहाँ- जहाँ दिखा ख़ुशी का आफ़ताब,
वहां के हो लिए.

बुझा दिया है हमने,

ऐ सितमगर ज़माने,
 ना कर  इन "मुन्तजिर निगाहों" से मेरे जलने का इंतज़ार ...


अब मुस्कराहट की बारिश से, बुझा दिया है हमने,
"शोला ऐ गम"

ना करना कभी आजमाइश

ना करना कभी आजमाइश,
 मेरी गुजरी हयात के पन्नो को पलट कर पढने  की ,




हर लफ्ज़ दर्द की स्याही से लिखा है ,


तेरे अश्को से इबारते ऐ गम कही बह ना जाये 

03 January, 2012

हयात जन्नत बन जाती है,

कभी टूटे खवाबो की यादे नींद उड़ा देती है ,
तो कभी अधूरे  खवाबो को पूरा करने की हसरत,
नींद से जगा देती है


कभी हौसलों की चमक इतनी, 
कि शब् को सहर बना देती है,
कभी हो जाये इतनी कम के, 
हीरे को कोयला बना देती है,


हर काम में हो  मोहब्बत की खुशबू तो ,
बेकार गुल को गुलाब बना देती है,
और, आ जाये बू  ऐ अदावतें तो,
चमन को वीरान बना देती है,


ईमान ओ करम से जियो तो,
हयात  जन्नत हो जाती है,
जो पड़ी कुफ्र की परछाई तो ,
हयात दोजक हो जाती है,


आज ये मेरा दिल उदास है,,

संग अपने अँधेरी रात है ,
ये आलम भी तनहा ओ चुपचाप है,
के आज ये मेरा दिल उदास है,,

यारो की बारिश ऐ कहर में मिले जो जख्म,
वो तो भर गए कल ही ,
पर फिर दाग देखकर आज ये मेरा दिल उदास है,,

मुझे रही बेवफाई से अदावतें हरदम ,
गम  ने तो निभाई वफ़ा,
पर वक़्त ऐ फरहत की जफाये,
देखकर आज ये मेरादिल उदास है ,

हर ख्वाब टूट गया,
हुया मेरी खुआविशों का क़त्ल,
और बीते लम्हो की याद में,
फिर आज ये मेरा दिल उदास है